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डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक से क्या हैं ? उम्मीदे उत्तराखंड की.

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को भारत सरकार  में मानव संसाधन विकास मंत्रालय मिला है. इस मंत्रालय  का काम देश में प्राथमिक और उच्च शिक्षा को नियंत्रित करना है . देश में आज  शिक्षा की स्थिति  दुनिया कई देशों से बहुत बेहतर है . लेकिन भारत  को दुनिया  में महाशक्ति बनना है तो इसमें अभी बहुत क्रन्तिकारी परिवर्तन करने की जरुरत है . इसलिए जितना बड़ा यह मंत्रालय है निशंक जी के सामने उतनी ही बड़ी चुनौतियां भी हैं.



जानते हैं, क्या है ? उत्तराखंड सहित देश में शिक्षा छेत्र की कुछ शुरुआती समस्याएं ?

1. छात्र शिक्षक अनुपात अधिक होना 
2. क्लास में पढ़ाने  को लेकर शिक्षकों  की  उदासीनता 
3.रोजगारपरक पाठ्यक्रम का आभाव 
4. पुराने ज़माने का पाठ्यक्रम 
5. हर भाषा  में अच्छी पुस्तकों के अनुवाद का आभाव 
6. पुस्तकों के डिजिटल संस्करण की कमी 
7. गरीब, निम्न मधयम वर्गीय छात्रों तक डिजिटल वीडियो पाठ्यक्रम का आभाव
9. गरीब, निम्न मधयम वर्गीय छात्रों तक मोबाइल व टेबलेट की पहुँच न होना .
10. अधिकांश मध्यम  और छोटे  सरकारी संस्थानों में रोजगारपक वर्ग में  सीटों की कमी और गुणवत्ता की कमी

उत्तराखंड की क्या है उम्मींदे ?

  • उत्तराखंड को नया कुछ नहीं चाहिए. जो है बस उसे ही बेहतर बनाने से अधिकांश समस्याओं का हल हो जायेगा.
  • स्कूल है शिक्षको की कमी पूरी कर दी जाये, स्कूलो में किताबे समय पर पहुंचा दी जाये. टीचरों की अकादमिक गुणवत्ता बड़ा दी जाये.

  • एक महत्वपूर्ण सुझाव 1 से लेकर 12वीं तक पारम्परिक टीचरों की अपेक्षा रोजगारपरक डिग्री वाले टीचरों को भर्ती  करना. जैसे विज्ञान विषय पढ़ने  के लिए प्लेन  बी.एस.सी. की जगह बी.टेक डिग्री वाले टीचरों को मौका देना. 
  • शिक्षण संस्थानों के लिए फंड की व्यवस्था समय पर  करना. पॉइंट नोटेड समय पर करना .
  • ऐसे शिक्षक जो अहंकारी और नेता गिरी वाले मनमौजी हों जिनकी पढ़ाने  से ज्यादा अन्य कामो में ज्यादा  रूचि हो . उनकी इस तीव्र इच्छा का सम्मान करते हुए इनकी विदाई का रास्ता साफ करवाना. 
  • 10 वीं  क्लास के टीचर का बिना आयोग की परीक्षा पास किये बिना  11 वीं और 12 वीं क्लास में पढ़ाने  के लिए प्रमोशन  कर बच्चों के भविष्य के साथ खेलने से रोकना.   
  • N.I.T.  उत्तराखंड के स्थायी कैंपस की समस्या का हल निकालना.
  • सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं और डाक्टरी सीटों को बढ़ाना .जंग खा रही  करोडो की मशीनों चलवाना. हैं 

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