वि शान्ताराम | V. SHANTARAM IN HINDI
आज हम बात कर रहे है व् शांताराम जी की। २० वीं सदी की शुरुआत में जैसे ही सिनेमा ने एक नए दौर में कदम रखा और मूविंग सिनेमा का दौर भी शुरू हो चूका था तभी व् शांताराम जी का जन्म 18 नवंबर 1901 में कोल्हापुर में हुवा था। इनका पूरा नाम शान्ताराम राजाराम वांकुद्रे था।
क्योंकि आज 18 नवंबर 2017 को गूगल ने अपने डूडल में को जगह व् शांताराम जी दी है। गूगल डूडल ये गूगल की एक सेवा है जिसके द्वारा ये पूरी दुनिया को कुछ ऐसी चीज ,लोगों , अविष्कारों के बारे में बताता है जो की उस दिन से सम्बंधित हो और महत्वपूर्ण हो।
व् शान्ताराम जी एक महान फिल्म निर्देशक और फिल्म एडिटर थे। इन्होने फिल्मो के निर्देशन में हमेशा एक नए द्रष्टिकोण का उपयोग किया जो उनकी फिल्मो में साफ़ देखने को मिलता है। उन्होंने हमेशा नइ तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया।
पहले ये एक रेलवे वर्कशॉप में काम करते है। बाद में ये काम छोड़कर इन्होने अपने करियर की एक नयी शुरुआत महारष्ट्र फिल्म कम्पनी से की थी। जो कोल्हापुर में थी।
पहले उन्होंने फिल्मो में सह किरदार निभाए और बाद में फिल्म निर्देशन के फिल्ड में आ गए। अगर उनकी फिल्मो की बात करें तो तीन बत्ती चार रस्ते , झनक झनक बाजे पायल , अमर ज्योति , सुरंग , पिंजरा, नवरंग , दो आँखें बारह हाथ , आदमी {मानुष } कहा जाता है की इनकी इस फिल्म की तारीफ चार्ली चैप्लिन ने भी की थी।
उन्होंने हमेशा अपनी फिल्मो में सामाजिक जटिलताओं को भी दर्शाया और जटिलताओं को दूर करने के उपाय भी सुझाये। उन्होंने महिलाओ की सामजीक स्थिति को भी अपनी फिल्मो में बता है।
इन्होने प्रभात फिल्म कंपनी बनाई और एक फिल्म बनाई अयोध्या का राजा और बाद में राजकमल कलामंदिर स्टूडियो की स्थापना की और बाद में इस बैनर के तले की फिल्म बनायीं थी।
हम उन्हें स्वयं में ही एक संस्थान कह सकते क्योंकि वो प्रतिभा के इतने धनि थे। उनकी फिल्मो का संगीत भी बहुत शानदार होता था। इन्हे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया है। और इनके नाम से भी कई पुरस्कार है।
व् शान्ताराम जी एक महान फिल्म निर्देशक और फिल्म एडिटर थे। इन्होने फिल्मो के निर्देशन में हमेशा एक नए द्रष्टिकोण का उपयोग किया जो उनकी फिल्मो में साफ़ देखने को मिलता है। उन्होंने हमेशा नइ तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया।
पहले ये एक रेलवे वर्कशॉप में काम करते है। बाद में ये काम छोड़कर इन्होने अपने करियर की एक नयी शुरुआत महारष्ट्र फिल्म कम्पनी से की थी। जो कोल्हापुर में थी।
पहले उन्होंने फिल्मो में सह किरदार निभाए और बाद में फिल्म निर्देशन के फिल्ड में आ गए। अगर उनकी फिल्मो की बात करें तो तीन बत्ती चार रस्ते , झनक झनक बाजे पायल , अमर ज्योति , सुरंग , पिंजरा, नवरंग , दो आँखें बारह हाथ , आदमी {मानुष } कहा जाता है की इनकी इस फिल्म की तारीफ चार्ली चैप्लिन ने भी की थी।
उन्होंने हमेशा अपनी फिल्मो में सामाजिक जटिलताओं को भी दर्शाया और जटिलताओं को दूर करने के उपाय भी सुझाये। उन्होंने महिलाओ की सामजीक स्थिति को भी अपनी फिल्मो में बता है।
इन्होने प्रभात फिल्म कंपनी बनाई और एक फिल्म बनाई अयोध्या का राजा और बाद में राजकमल कलामंदिर स्टूडियो की स्थापना की और बाद में इस बैनर के तले की फिल्म बनायीं थी।

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