उत्तराखंड के 5 प्रसिद्ध मंदिर: इतिहास, महत्व और कैसे पहुँचें - ApnaPahad

Breaking

Thursday

उत्तराखंड के 5 प्रसिद्ध मंदिर: इतिहास, महत्व और कैसे पहुँचें

 उत्तराखंड के 5 प्रसिद्ध मंदिर: इतिहास, महत्व और कैसे पहुँचें?


उत्तराखंड को देवों की भूमि (देवभूमि) भी कहा जाता है। यहाँ पर हिमालय की ऊँची बर्फीली चोटियाँ, पवित्र नदियाँ, संस्कृति, वास्तुकला और बहुत ही विश्व प्रसिद्ध मंदिर भी हैं। उत्तराखंड के चार धाम (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) तो आपने सुने ही होंगे और आज हम उत्तराखंड के 5 फेमस मंदिरों, उनके इतिहास और वहाँ पहुँचने के तरीकों के बारे में जानेंगे। मैंने बहुत ही आसान भाषा में आपको समझाने का प्रयास किया है।


 1. केदारनाथ मंदिर :


जिला - रुद्रप्रयाग

देवता (भगवान) - शिव जी (महादेव)

विशेषता - 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक

केदारनाथ उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है और यह मंदिर मंदाकिनी नदी के निकट स्थित है।

केदारनाथ को पंचकेदार में सबसे प्रमुख माना जाता है क्योंकि मान्यता है कि महाभारत के बाद पांडवों ने भगवान शिव की खोज की थी और शिव ने बैल का रूप धारण किया और बाद में उनका पृष्ठभाग केदारनाथ में प्रकट हुआ। इस मंदिर के वर्तमान स्वरूप का संबंध गुरु शंकराचार्य से भी जोड़ा जाता है। केदारनाथ मंदिर खराब मौसम और भारी बारिश के कारण साल में बस कुछ महीनों के लिए ही खुला रहता है।




केदारनाथ पहुँचने का तरीका-


• सबसे पहले आपने हरिद्वार/ऋषिकेश मार्ग से होते हुए सोनप्रयाग पहुँचना होता है फिर सोनप्रयाग से गौरी कुंड तक जाना है।

• गौरी कुंड से केदारनाथ मंदिर की दूरी 17-18 किलोमीटर है जो कि आप पैदल यात्रा करके या अन्य उपलब्ध साधनों से भी कर सकते हैं।

• आप केदारनाथ की यात्रा गुप्तकाशी या फाटा से हेलीकॉप्टर के माध्यम से भी कर सकते हैं, जिसकी टिकट बुकिंग आप IRCTC की HeliYatra वेबसाइट पर भी कर सकते हैं।


2.बद्रीनाथ मंदिर

जिला- चमोली

देवता (भगवान) - भगवान विष्णु

ऊँचाई - अलकनंदा नदी से लगभग 3100 मीटर (10279 फीट)

बद्रीनाथ मंदिर बहुत ही सुंदर पहाड़ों (नर और नारायण) की गोद में बसा हुआ एक प्रसिद्ध मंदिर है और यह भारत के चार धामों में से भी एक है जिस वजह से हर साल यहाँ देश-विदेश के बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्री विष्णु के दर्शन के लिए आते हैं।

यह मंदिर अलकनंदा नदी के निकट स्थित है और तिब्बत सीमा से पहले स्थित माना गाँव के नियर है। यहाँ दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु बहुत सी शांति, प्राकृतिक सुंदरता और साफ हवा को महसूस करते हैं। यह प्राचीन मंदिर पहाड़ी शैली और वास्तुकला में बना हुआ सुंदर धरोहर है। इस मंदिर के संरचना में आपको बहुत से छोटे और भी मंदिर, देवी-देवताओं की उपस्थिति देखने को मिलती है जो कि आकर्षण का केंद्र है।




ऐतिहासिक महत्व-

बद्रीनाथ मंदिर का इतिहास बहुत ही प्राचीन है जिसका वर्णन प्राचीन कथाओं, ग्रंथों में भी मिलता है। पुरानी कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने यहाँ पर कई वर्षों तक ध्यान किया था और माँ लक्ष्मी ने भगवान श्री हरि विष्णु की रक्षा के लिए बेर के पेड़ का रूप धारण किया था, इसलिए मंदिर का नाम बद्रीनाथ पड़ा। बहुत सी और भी कहानियाँ हैं मंदिर के इतिहास के बारे में बताती हैं जो सुनने में बहुत ही रोचक है।

बद्रीनाथ आने का सही समय -

अगर आप भी बाबा बद्री के दर्शन करना चाहते हैं तो आने का सही समय मई के महीने से अक्टूबर के बीच का समय है, क्योंकि सर्दियों में अत्यधिक बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।

मंदिर सुबह 4:30 AM खुलता है तथा दिन में 1 PM से 4 PM के समय दोपहर की पूजा के लिए बंद होता है, फिर शाम को 4 PM से रात के 9 बजे तक खुला रहता है।

पहुँचने का तरीका -

बद्रीनाथ आप ऋषिकेश तक ट्रेन से आ सकते हैं और फिर ऋषिकेश से बस या टैक्सी के द्वारा पहाड़ों के मनमोहक दृश्यों की यादों को संजोकर आप बद्री विशाल की गोद में चले आएंगे, एक ऐसा अनुभव जो आपको जीवन भर याद रहने वाला है। अगर आप प्लेन से आना चाहते हैं तो नियरेस्ट एयरपोर्ट देहरादून का जॉलीग्रांट एयरपोर्ट है लेकिन मैं आपको एडवाइस करूँगा कि आप बस या फिर टैक्सी से ही यात्रा करें क्योंकि हवाई यात्रा बहुत ही महंगी है।


3. गंगोत्री मंदिर

जिला - उत्तरकाशी
देवी (भगवान) - माँ गंगा

गंगोत्री मंदिर भी उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है और यह मंदिर भागीरथी नदी के किनारे स्थित है।

गंगोत्री मंदिर चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुरानी मान्यता के अनुसार राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर स्वर्ग की ये पवित्र नदी पृथ्वी पर आ गई, भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा की तेज धारा को धारण कर पृथ्वी तक पहुँचाया।




पहुँचने का तरीका -

आप ऋषिकेश या हरिद्वार से सड़क मार्ग द्वारा उत्तरकाशी होते हुए गंगोत्री पहुँचा जा सकता है, आप बस या टैक्सी से यात्रा का आनंद ले सकते हैं।



4. यमुनोत्री मंदिर

स्थान - उत्तरकाशी जिला
देवी - माँ यमुना जी

यमुनोत्री चार धाम यात्रा का पहला प्रमुख पड़ाव माना जाता है। यह मंदिर यमुना नदी के उद्गम क्षेत्र के निकट स्थित है, और इसका अपना एक अलग ही स्वरूप है।

मंदिर में माँ यमुना की पूजा की जाती है। यहाँ स्थित गर्म जल के कुंड भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। हर साल बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ माँ यमुना के दर्शन के लिए उपस्थित होते हैं और माँ उन पर अपना आशीर्वाद हमेशा बनाए रखती हैं।




कैसे पहुँचें:

हरिद्वार या ऋषिकेश से सड़क मार्ग द्वारा जानकी चट्टी पहुँचा सकते हैं और फिर जानकी चट्टी से लगभग 5–6 किमी की पैदल यात्रा के बाद यमुनोत्री मंदिर पहुँचते हैं।

5. जागेश्वर धाम

जिला - अल्मोड़ा
देवता - भगवान शिव

जागेश्वर उत्तराखंड के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मंदिर समूहों में से एक है। यहाँ एक ही स्थान पर अनेक प्राचीन पत्थर के मंदिर हैं जो सभी एक ही तरीके की खास कला से निर्मित हैं।

उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार जागेश्वर में लगभग 125 मंदिरों और अनेक प्राचीन मूर्तियों का समूह है। यह क्षेत्र भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है और मंदिरों का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा माना जाता है।

जागेश्वर को देवदार के घने जंगलों और जटागंगा नदी के बीच स्थित होने के कारण विशेष प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण मिलता है .




कैसे पहुँचें:

अगर आप भी जागेश्वर मंदिर आकर भगवान शिव की आराधना करना चाहते हैं तो आप पहले ट्रेन या बस से हल्द्वानी रेलवे या बस स्टॉप पहुँचें और फिर हल्द्वानी से आप अल्मोड़ा होते हुए सड़क मार्ग द्वारा जागेश्वर पहुँच सकते हैं। हल्द्वानी से अल्मोड़ा की दूरी 90 किमी है और अल्मोड़ा से जागेश्वर मंदिर 40-45 किमी की दूरी पर है।


अगर आपको ये Article पसंद आया हो तो आप Post को Like करें या अगर कोई सुझाव हो तो Comment Box में Share कर सकते हैं। हमारी टीम आपके सुझावों को प्राथमिकता देगी और उन्हें बेहतर तरीके से लागू करने का प्रयास करेगी।


  Thank You!

Team ApnaPahad


No comments:

Post a Comment

comment Below.