वास्तव में बालेश्वर मंदिर समूह का निर्माण चन्द वंश के राजा उद्यान चन्द ने वर्ष 1420 A.D में प्रारम्भ करवायाऔर बाद में इनके ही वंश के राजा विक्रम चन्द ने 1437 A.D में इसका निर्माण पूरा करवाया।
चन्द शासकों की भगवान शिव के प्रति पूर्ण आस्था थी। वर्तमान में बालेश्वर मंदिर समूह को इस क्रम में पूजा जाता है । जिसमें तीन भाग हैं। पहला जो मुख्य भाग है वह भगवान शिव को समर्पित है, दूसरा भाग रत्नेश्वर जी को और तीसरा भाग चम्पावती देवी दुर्गा जी को समर्पित है। चम्पावती दुर्गा जी को यहाँ कुल देवी के रूप में पूजा जाता है जिसका पता मन्दिर में स्थापित इनकी मूर्ति से भी चलता है।
बालेश्वर मंदिर पूर्ण रूप से शिला(पत्थर ) खंडो से निर्मित है। इन शिला खंडो पर विभिन्न देवी देवताओं और जीवों जैसे हाथी,शेर,और फूलों आदि के सजीव से चित्र उकेरे हुए हैं। मंदिर समूहों की निर्माण शैली की बात करें तो ये लेटिन और सेकरी शिखर शैली में निर्मित हैं।
मंदिर समूह के दो गर्भगृह हैं जिनके गेट पर शिला(पत्थर ) खंडो से निर्मित सुंदर मंडप हैं। मंडपों के अंदर उलटी छत पर भी सुन्दर मूर्ति चित्र उकेरे हुए हैं। मंदिर के दक्षिणी भाग में स्थित एक पानी का प्राकतिक स्त्रोत जिसे नौला कहा जाता है, स्थित है। इस नौले को भी मंडप से ढका गया है। इसमें पानी जमीन के अंदर से निकलता है। नौले के दीवार पर भी सुन्दर डिजाइन बने हुए हैं।
बालेश्वर मंदिर समूह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा एक राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक घोषित है। इस कारण इसके संरक्षण की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के देहरादून मंडल की है।

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